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भोजराज मंदिर में महाशिवरात्रि का पर्व धूमधाम से संपन्न हुआ

 भोजराज मंदिर में परंपरागत  महाशिवरात्रि पर्व संपन्न हुआ।      भोजराज मंदिर प्रांगण में इस वर्ष भी महाशिवरात्रि पर्व परंपरागत रूप से मनाया गया। भोलेनाथ का अभिषेक विधि विधान के साथ संपन्न हुआ। स्व एम .एम .दवे स्मृति सम्मान इस वर्ष वरिष्ठ समाज सेवी जगदीश चंद्र जोशी को प्रदान किया गया और  स्व सुशीला देवी शुक्ल स्मृति सम्मान डॉ॰ सुलोचना जोशी को प्रदान किया गया।प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी रजनीश दवे और उनकी टीम द्वारा एक नये  नाटक "पड़ी लकड़ी "  का सफल मंचन किया गया।नाटक में  व्यवस्था पर प्रहार ,मोहल्ले की आपसी वैमनस्यता और नेताओं के पट्ठों पर करारा व्यंग्य किया गया है। चुटीले संवाद व्यवस्था की पोल खोलते नजर आये। नाटक ने दर्शकों को गुदगुदाने के साथ ही दूसरों के फटे में पाँव ना धरने की सीख भी दी। रजनीश दवे के साथ ही सागर शेन्डे ,शोभना विस्पुते ,अजय जोशी , सचिन भावसार और अनिल भाटिया ने प्रभावी अभिनय और संवादों से दर्शकों को बांधें रखा।उल्लेखनीय है कि सिर्फ एक घंटे की रिहर्सल में नाटक तैयार किया गया और विगत दस वर्षों की नाट्य मंचन की परंपरा को निभाया गया।सम्मान समारोहकार्यक्रम के प्रारंभ में अविघ्ना दुबे , राजेश दुबे ने भक्ति गीत  एवं देवेंद्र बक्षी ने पुराने गीतों की प्रस्तुति दी।स्वर्गीय एम एम दवे स्मृति सम्मान पत्र का वाचन अनुप पुरणिक ने किया तथा स्वर्गीय श्रीमती सुशीला देवी शुक्ल स्मृति सम्मान पत्र का वाचन प्रतीक्षा दुबे ने किया। स्वर्गीय दवे के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला ललित जोशी ने तथा स्वर्गीय शुक्ला के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला निशा शुक्ला ने।  जगदीश चंद्र जोशी समाज के सर्वमान्य निष्पक्ष निस्वार्थ व्यक्ति है यह बात प्रदीप जोशी ने कही। डॉ सुलोचना जोशी से जुड़ी हुई बहुत सी आत्मीय बातें श्रीमती रानी दुबे एवं राजेश दुबे रज्जू ने कहीं।   जगदीश चंद्र जोशी ने कहा कि भोजराज मंदिर परिसर में यह सम्मान पाकर मैं अभीभूत हूं उन्होंने भोजराज मंदिर से जुड़े हुए कई प्रसंग सुनाए।  सुलोचना जोशी ने कहा कि अपने ही घर में सम्मान पाकर मन प्रफुल्लित हो गया है। उन्होंने परिवार से जुड़ी हुई बहुत सी अनसुनी  अनकही बातें  प्रसंग वश सभी के साथ साझा की।ओमप्रकाश दुबे ने अपने उद्बोधन में कहा कि भोजराज मंदिर की परंपरा को बनाए रखना हम सभी का दायित्व है। धीरज दुबे ने कहा कि परंपराएं पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होती रहती है हर आने वाली पीढ़ी को अपने पूर्वजों की स्मृति को संजोकर रखना चाहिए।कार्यक्रम का संचालन प्रदीप जोशी ने किया एवं आभार राजेश शुक्ला ने माना।अंत में भगवान भोलेनाथ का प्रसाद एवं फलाहार के साथ सभी ने एक दूसरे से बिदाई ली।

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