ब्रह्मा विष्णु तथा अन्य देवता ऋषि भी भगवान शिव के पीछे-पीछे चल रहे हैं। अतः कृपा सिंधु भगवान शिव सबको विदा कर देते हैं और अपने निज स्थान कैलाश पर्वत में सती के साथ सांसारिक जीवन सुविधाओं का आनन्द प्राप्त कर रहे हैं। आचार्य सुशील शर्मा ने कहा कि हे नारद वत्स फिर भगवान शिव सती को नौ प्रकार की भक्ति नवधा भक्ति का उपदेश देते हैं। जिसमें भगवान शिव ने कहा कि श्रवण कीर्तन स्मरण सेवन, दास्य, अर्चन, वंदन, सरल और आत्म समर्पण यह भक्ति के 9 अंग हैं तथा मैं स्वयं भक्ति के प्रभाव से जातिहीन पुरुषों के घर भी चला जाता हूं। ब्रह्मा जी नारद जी से कहते हैं कि ज्ञान भक्ति के बिना नहीं होता है और भाव के बिना भक्ति नहीं होती है। इस अवसर पर प्रदीप वर्मा स पत्नी, अमर अग्रवाल, निधि गौतम, माया अग्रवाल, सुधा वर्मा, श्वेता शर्मा, विनोद त्यागी स पत्नी, मनोज चतुर्वेदी, अनीता शर्मा आदि श्रोता गण उपस्थित थे। कार्यक्रम के मुख्य यजमान प्रदीप वर्मा रहे।
शिव होल्का मंदिर में महाशिव कथा पुराण का आयोजन हुआ
नगर के मोहल्ला कायस्थान स्थित शिव होल्का मंदिर में शुक्रवार को कथावाचक पंडित सुशील शर्मा आचार्य ने अपने मुखारविंद से शिव महापुराणकथा का श्रवण पाठ किया। कथा वाचक सुशील शर्मा ने बताया कि शिव महापुराण की कथा के क्रम में भगवान शिव द्वारा माता सती को उनकी तपस्या के बाद उनको मनवांछित वर प्रदान करते हैं और माता सती के विवाह होने के बाद उनको नंदी पर बैठाकर कैलाश पर्वत की ओर चल देते हैं
