अनेक पुस्तकों पर प्रकाशक का नाम, मूल्य, संस्करण, आईएसबीएन संख्या आदि अनिवार्य सूचनाओं का प्रकाशित न किया जाना, जो स्पष्ट रूप से अवैधानिक है। विद्यालयों में सरकार/बोर्ड द्वारा अनुमोदित पुस्तकों के स्थान पर निजी व अनधिकृत पुस्तकों को लागू किया जाना।सीबीएसई एवं आई सीएसई बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों की अवहेलना करते हुए अभिभावकों पर आर्थिक दबाव एवं मानसिक उत्पीड़न किया जाना। यह संपूर्ण व्यवस्था एक प्रकार के पुस्तक माफिया तंत्र की ओर संकेत करती है, जिसमें विद्यालय व विक्रेता की मिलीभगत की प्रबल आशंका है।उक्त कृत्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, केंद्र एवं उत्तर प्रदेश सरकार के शासनादेशों तथा बोर्ड नियमावली के अंतर्गत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आते हैं। अतः आपसे सादर किन्तु दृढ़तापूर्वक अनुरोध है कि प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की जाए। दोषी विद्यालयों एवं संबंधित विक्रेताओं पर कठोर विधिक एवं प्रशासनिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। स्पष्ट आदेश निर्गत हों कि कोई भी विद्यालय अभिभावकों को एकल दुकान से पुस्तक खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेगा। जनपद स्तर पर सीबीएसई आईसीएसई नियमों का सख़्ती से अनुपालन कराया जाए।अपना दल (एस) यह स्पष्ट करता है कि यदि इस विषय पर शीघ्र प्रभावी कार्यवाही नहीं की गई, तो संगठन लोकतांत्रिक एवं विधिक दायरे में रहकर जनहित में आंदोलनात्मक कदम उठाने के लिए बाध्य होगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।यह पत्र जनहित में समाचार-पत्रों के माध्यम से भी प्रकाशित किया जा रहा है ताकि अभिभावक वर्ग को अपने अधिकारों की जानकारी प्राप्त हो सके।
अपना दल (एस) ने निजी विद्यालयों द्वारा पाठ्य पुस्तकों की खरीद पर घोर उल्लंघन के संबंध में दंडात्मक कार्यवाही हेतु शासन/प्रशासन को ज्ञापन सौंपा
जनपद के निजी विद्यालयों द्वारा पाठ्य-पुस्तकों की एकल दुकान से अनिवार्य खरीद, प्रकाशन विवरण के अभाव, अनधिकृत पुस्तकों के प्रयोग एवं सीबीएसई/ आईसी एसई बोर्ड नियमों के घोर उल्लंघन के संबंध में विधिक जांच एवं दंडात्मक कार्यवाही हेतु।अत्यंत गंभीर विषय की ओर आपका ध्यान आकृष्ट कराना आवश्यक है कि जनपद बिजनौर के अंतर्गत अनेक निजी विद्यालयों द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में संगठित रूप से नियमविरुद्ध, मनमानी एवं आर्थिक शोषणकारी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, जो न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि शासन की मंशा एवं शिक्षा के मूल उद्देश्यों के भी विपरीत हैं।प्राप्त जनशिकायतों एवं स्थलीय तथ्यों के आधार पर निम्नलिखित गंभीर अनियमितताएं परिलक्षित होती हैं— विद्यालय प्रबंधन द्वारा अभिभावकों को केवल एक नामित दुकान/विक्रेता से पाठ्य-पुस्तकें खरीदने हेतु बाध्य किया जाना, जो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, प्रतिस्पर्धा अधिनियम एवं शिक्षा से संबंधित शासनादेशों का प्रत्यक्ष उल्लंघन है।
