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*इन्दौर निवासी संस्कारों की ज्योति तेजस्वी दुबे श्री नाथ जी की देखी गई अनन्य भक्त*

 *कल मुझे हमारे समाज की एक ऐसी प्यारी बिटिया से मिलने और उसे समझने का अवसर मिला, जिसे पाकर मैं स्वयं को सचमुच सौभाग्यशाली महसूस कर रहा हूँ।**इस बिटिया का नाम है *सुश्री तेजस्वी दुबे*। *कक्षा 12वीं में पढ़ने वाली मात्र 16 वर्ष की यह बालिका अपने भीतर जितना संस्कार और भक्ति भाव लिए हुए है, वह आज के समय में सचमुच प्रेरणादायक है।**कल जब मैं उनके घर पहुँचा तो मेरी नज़र एक छोटे से ब्लैकबोर्ड पर पड़ी। उस पर बड़े भाव से लिखा था**“जगत तारण, भव तारण, वे ही हमारे श्रीनाथ जी हैं।”**यह पढ़कर मेरी जिज्ञासा बढ़ गई। मैंने तुरंत उनकी *माताश्री श्रीमती अंजू जी दुबे और पिताश्री श्री सतीश दुबे जी (हिंगोनिया), जिन्हें हम स्नेह से ‘ब्यायजी’ कहते हैं*, से पूछा कि यह किसने लिखा है। दोनों ने मुस्कुराते हुए कहा—*“यह हमारी गुड़िया तेजस्वी ने लिखा है।”*फिर तो मेरा मन हुआ कि तेजस्वी से अवश्य मिलूँ और उसके बारे में जानूँ। जब तेजस्वी आई तो बातचीत में पता चला कि इतनी छोटी उम्र में भी वह प्रतिदिन लगभग *एक घंटा पूजा-पाठ करती है। वह श्रीनाथ जी की अनन्य भक्त है।**आज जहाँ अधिकतर बच्चे टीवी सीरियल और फिल्मों में समय बिताते हैं, वहीं तेजस्वी का मन भक्ति, भजन और आध्यात्मिकता में रमता है।**बातचीत के दौरान उनकी माताश्री अंजू जी ने बताया कि *आज सुबह से ही तेजस्वी जिद कर रही थी कि इंदौर में सनातन के प्रखर कथावाचक पंडित इंद्रेश जी पधार रहे हैं, उन्हें मिलने अवश्य ले चलिए।**आज के समय में जब युवा पीढ़ी कई बार भटकती दिखाई देती है, ऐसे समय में तेजस्वी जैसी संस्कारवान और भक्तिभाव से ओतप्रोत बिटिया को देखकर सच में मन गर्व से भर जाता है**तेजस्वी के संस्कारों के पीछे उनके माता-पिता की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।माताश्री अंजू जी एक अध्यापिका हैं, और पिताश्री सतीश दुबे जी स्वयं समाजसेवी हैं तथा प्रतिदिन दो घंटे पूजा-पाठ करते हैं। ऐसे वातावरण में पली-बढ़ी तेजस्वी का संस्कारवान होना स्वाभाविक है।**आज की युवा पीढ़ी के लिए तेजस्वी दुबे एक सुंदर उदाहरण है। हमें आधुनिक तो बनना चाहिए, परंतु अपनी जड़ों, अपने संस्कारों और अपनी संस्कृति को कभी नहीं भूलना चाहिए*।*तेजस्वी, तुमसे फिर-फिर* *मिलने की इच्छा रहेगी**और सच में धन्य हैं ऐसे माता-पिता, जिन्हें तुम जैसी संस्कारवान बिटिया का स्नेह और गौरव प्राप्त हुआ है।

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