इन्दौर में समाज सेवा में अग्रणी राजेश दुबे (हिंगोनिया ) के मार्गदर्शन में उभरता समर्पित व्यक्तित्व
औदुम्बर समाज में सेवा, समर्पण और सहयोग की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले जाने-माने समाजसेवी सतीश दुबे (हिंगोनिया) का नाम आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। उन्होंने वर्षों से समाज के लिए जो निस्वार्थ योगदान दिया है, वह उन्हें समाज में “दानवीर कर्ण” की याद दिलाने के लिए पर्याप्त है। सतीश दुबे ने न केवल इंदौर शहर की अनेक सामाजिक एवं गैर-सामाजिक संस्थाओं में अपना अमूल्य योगदान दिया है, बल्कि औदुम्बर समाज के लिए भी उन्होंने सदैव बढ़-चढ़कर सहयोग किया है। सामूहिक विवाह हो या सामूहिक सम्मेलनों में उन्होंने प्रत्येक जोड़े को गृहस्थी की अलमारियां भेंट कर एक नई मिसाल प्रस्तुत की थी इसके साथ ही परशुराम आश्रम, उज्जैन हेतु चंदा एकत्रित करने में भी उन्होंने निजी स्तर पर धन, श्रम और समर्पण के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जो वर्तमान में भी जारी है।इन्हीं के सान्निध्य और प्रेरणा से उनके भतीजे राजेश दुबे (हिंगोनिया), जो वर्तमान में “शिवशक्ति पेनल” के कार्यकारिणी सदस्य हैं, समाज सेवा के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। राजेश दुबे का व्यक्तित्व उनके काका श्री सतीश दुबे के मार्गदर्शन और आशीर्वाद का ही परिणाम है। सतीश दुबे एवं राजेश दुबे ने समाज में रहते हुए अपने जीवन का अमूल्य आधा हिस्सा समाज सेवा को समर्पित किया है। यह योगदान समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है। सतीश दुबे का विशाल हृदय, सरल स्वभाव और उच्च कोटि का सामाजिक संचालन कौशल उन्हें समाज में विशेष स्थान दिलाता है। उल्लेखनीय है कि सतीश दुबे स्वयं अध्यक्ष पद की योग्यता रखते हुए भी, समाजहित को सर्वोपरि मानते हुए ब्रजेश जोशी के नेतृत्व में “शिवशक्ति पेनल” के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रहे हैं। उनका यह त्याग और समर्पण समाज में एकता और संगठन की मिसाल प्रस्तुत करता है। राजेश दुबे ने अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा कि – “मैं अपने पिता तुल्य काका साहब सतीश दुबे का जीवन भर ऋणी रहूँगा। उनका आशीर्वाद और मार्गदर्शन ही मेरा अस्तित्व है। मैं स्वयं को धन्य मानता हूँ कि मुझे ऐसे कर्मयोगी, निष्ठावान और समर्पित व्यक्तित्व का सान्निध्य प्राप्त हुआ।” अंत में, शिवशक्ति पेनल, समस्त औदुम्बर समाज एवं हिंगोनिया परिवार की ओर से सतीश दुबे को सादर प्रणाम एवं कृतज्ञता ज्ञापित की गई। उनके विचार, आदर्श और मार्गदर्शन समाज के लिए अमूल्य धरोहर हैं।
