वहीं डॉ. स्वामी चेतन स्वरूप सहित अन्य संतों ने नदियों को निर्मल और स्वच्छ बनाए रखने के लिए जनजागरण अभियान चलाने की आवश्यकता पर जोर दिया।इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। मातृशक्ति की ओर से महिलाओं ने गंगा मैया के जयघोष के बीच पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली। कार्यक्रम का संचालन हरि अग्रवाल ने किया, जबकि आभार मुरली धामानी ने व्यक्त किया।
इन्दौर में दशहरा पर गूंजा पर्यावरण संरक्षण का संदेश, संतों ने जल बचाने और पौधारोपण का दिलाया संकल्प
इंदौर (म.प्र.) गंगा दशहरा के पावन अवसर पर पंचकुइया स्थित प्राचीन गंगा बगीची में श्रद्धा, आस्था और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम देखने को मिला। श्रद्धा सुमन सेवा समिति द्वारा आयोजित गंगा पूजन एवं महाआरती कार्यक्रम में शहर के संतों, समाजजनों और मातृशक्ति ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की। कार्यक्रम महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी चेतन स्वरूप, महामंडलेश्वर महंत पवनदास महाराज तथा वरिष्ठ संत राजानंद महाराज के सान्निध्य में संपन्न हुआ।कार्यक्रम की शुरुआत गंगा मैया के पूजन-अभिषेक और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई। श्रद्धालुओं ने गंगा जल से अभिषेक कर महाआरती में भाग लिया। इस दौरान संतों ने जल संरक्षण, नदियों की स्वच्छता और पर्यावरण बचाने का संदेश देते हुए उपस्थित नागरिकों को पानी की एक-एक बूंद बचाने का संकल्प दिलाया। साथ ही वर्षाकाल में अधिक से अधिक पौधारोपण करने और प्राकृतिक जल स्रोतों को स्वच्छ बनाए रखने का आह्वान किया गया।समिति के अध्यक्ष हरि अग्रवाल, राजेंद्र सोनी और गगेंद्र गर्ग ने बताया कि गंगा दशहरा पर प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम समाज में पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन के प्रति जागरूकता फैलाने का माध्यम बन चुका है। संतों ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रकृति और जल स्रोतों का संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है तथा प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है कि वह नदियों, बावड़ियों और कुओं को प्रदूषण मुक्त रखने में अपनी भागीदारी निभाए। महामंडलेश्वर पवनदास महाराज ने कहा कि जल ही जीवन का आधार है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
