देश व प्रदेश के किसानों की ज्वलंत समस्याओं को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर किसानों ने राष्ट्रपति के नाम एक संयुक्त ज्ञापन उपजिलाधिकारी चांदपुर के माध्यम से सौंपा। जिसमे भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां, अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा व किसान सभा संगठन शामिल रहे।
एकता उगराहां के मण्डल अध्यक्ष रवि चौधरी ने कहा कि देश का अन्नदाता आज गहरे आर्थिक संकट, कर्ज और नीतिगत उपेक्षा का शिकार है। खेती लाभ का साधन नहीं रह गई, बल्कि किसानों के लिए संघर्ष और अस्तित्व की लड़ाई बन चुकी है।
संयुक्त ज्ञापन में किसानों ने प्रमुख रूप से बिजली बिल 2025 की पूर्ण माफी, खाद की निर्बाध व कालाबाजारी-मुक्त आपूर्ति, किसान विरोधी बीज बिल की वापसी, एमएसपी की कानूनी गारंटी, सम्पूर्ण कर्ज माफी, गन्ना बकाया का ब्याज सहित तत्काल भुगतान,मील से 15 किमी दूरी के अंदर कोल्हू/क्रेसर पाबंदी बाले नियम की समाप्ति,आवारा पशुओं से फसल सुरक्षा,60 वर्ष से ऊपर किसानों को 10 हजार मासिक पेंशन तथा किसान समृद्धि सहायता राशि को बढ़ाकर 12 हजार प्रतिवर्ष करने जैसी अहम मांगें उठाईं।
किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने किसानों की इन बुनियादी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो आने वाले समय में व्यापक किसान आंदोलन के लिए सरकार स्वयं जिम्मेदार होगी।
किसानों ने स्पष्ट कहा कि “किसान बचेगा, तभी देश बचेगा” और सरकार को अन्नदाता के सम्मान व अधिकारों की रक्षा के लिए तुरंत ठोस कदम उठाने होंगे।
इस अवसर पर चौधरी विजयवीर सिंह,शमशाद हुसैन, मांगेराम सैनी,महेन्द्र सिंह,नरेश धारीवाल,प्रिन्स देओल,अमित चीमा,अंकित देओल,विवेक चौहान,दीक्षित चौहान,कुंदन सिंह, विकास चौधरी, आदि किसान मौजूद रहे।
