इस अवसर पर सतीश पाठक व उनकी धर्मपत्नी कीर्ति पाठक , सतीश पाठक के बड़े बहनोई प्रभुलाल शर्मा बांसवाड़ा, औदुम्बर महासभा इंदौर के अध्यक्ष आशुतोष शर्मा , औदुम्बर ब्राम्हण महासंघ महासचिव उमेश द्विवेदी, संरक्षक वरिष्ठ पत्रकार सतीश जोशी मंचासीन रहे ।
कार्यक्रम में उपस्थित परिजनों, मित्रो , रिश्तेदारों व सहकर्मा साथियो ने सतीश पाठक का पुष्पहार, पुष्प गुच्छ और शाल ,श्रीफल भेंट कर स्वागत और सम्मान किया। स्वागत का क्रम पूरे कार्यक्रम के दौरान चलता रहा । अपने संबोधन में ओमप्रकाश चौधरी नीमच ने कहा कि किसी विभाग में लेखपाल के पद पर लंबे समय तक कार्य करके निष्कलंक रूप सेवा निवृत्त हो जाना बड़ी उपलब्धि है। और सतीशजी ने यह कर दिखाया है। आशुतोष शर्मा ने भी सतीश पाठक के परिवार और विभाग में अपने कार्य के प्रति समर्पण की सराहना की। वरिष्ठ पत्रकार सतीश जोशी ने भी सतीश पाठक के अपनी सेवा के दौरान ईमानदारी से किये गए कार्यों का जिक्र करते हुए आशा व्यक्त की है कि अब वे समाज को अपनी सेवाओं से लाभान्वित करेंगे। प्रभुलाल शर्मा ने कहा कि शिक्षा विभाग और वह भी स्कूली शिक्षा जैसे शिक्षकों व कर्मचारियों की बहुतायत के बीच जिला कार्यालय में समर्पित भाव से कार्य करके सभी को संतुष्ट करने जैसा कठिन कार्य सतीश ने किया है। उसके लिये उनकी जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है। कार्यक्रम का संचालन करते अखिल भारतीय औदुम्बर ब्राम्हण महासंघ अध्यक्ष प्रदीप जोशी ने कहा कि भवानीशंकर और शारदा पाठक के सुयोग्य पुत्र सतीश पाठक ने अपने सेवाकाल में पूरी निष्ठा व ईमानदारी से कार्य किया और पत्नी कीर्ति पाठक ने उनकी व्यस्तता को समझते हुए उन्हें पूर्ण सहयोग दिया। कार्यक्रम में सतीश पाठक के पुत्र यश पाठक उनकी पुत्री कृतिका पाठक व दामाद सहित बड़ी संख्या में उनके परिजन ,रिश्तेदार ,शिक्षा विभाग के साथी गण और मित्र उपस्थित थे। कार्यक्रम के पश्चात सभी ने भोजन का आनंद लिया । कार्यक्रम का समापन सुंदरकांड के पाठ से हुआ ।इसके पूर्व 30 जनवरी को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में सतीश पाठक का सेवानिवृत्ति पर विदाई कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें जिला शिक्षा अधिकारी, संयुक्त संचालक स्कूली शिक्षा सहित लगभग 200 कर्मचारी उपस्थित रहे। पारिवारिक माहौल में आयोजित कार्यक्रम में सभी वक्ताओं ने सतीश पाठक के सेवाकाल और उनके द्वारा किये गए कार्यों व सहयोग की भूरी भूरी प्रशंसा की और सुखी और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
