बैठक में उपस्थित कुछ प्रमुख प्रतिनिधि जिनके नाम उल्लेखनीय हैं — विकास कुमार, सचिन, मुस्तफा, मनोज, नरेश और विक्रम सिंह। इन लोगों ने शासन से तत्काल जांच, फैक्ट्री के लाइसेंस की पड़ताल तथा प्रदूषण नियंत्रण के प्रभावी कदम उठाने की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर नदी और जलस्रोतों में प्रदूषण की पुष्टि होती है तो कानूनी कार्रवाई और फैक्ट्री को ठप्प कराने तक की कार्रवाई की जाएगी।स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से फैक्ट्री की गतिविधियों में तेज़ी आई है और उनके खेतों की फसलें तथा जानवरों का स्वास्थ्य भी प्रभावित होना शुरू हो गया है। ग्रामीणों ने कहा कि वे शांति पूर्ण तरीके से समस्या का समाधान चाहते हैं, लेकिन अगर स्थानीय प्रशासन उदासीन बना रहा तो उन्हें मजबूरन सख्त कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ेगा।आगे की कार्यवाही के संबंध में किसान यूनियन ने चेतावनी दी कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों को शिकायतें सौंपने की बात की है और आवश्यकता पड़ने पर उच्चाधिकारियों तथा जिला प्रशासन के खिलाफ भी व्यापक आंदोलन करेंगे। यूनियन ने स्थानीय प्रशासन से निवेदन किया है कि वह तुरंत फैक्ट्री की गतिविधियों की जांच कराए, पानी व वायु का नमूना लेकर रिपोर्ट साझा करे और यदि नियमों के विरुद्ध कार्यवाही पाई जाती है तो फैक्ट्री को बंद कराए।ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगाया जाना चाहिए ताकि प्रभावित लोगों की स्थिति का आकलन किया जा सके और जिन्हें तत्काल इलाज की आवश्यकता है उनका उपचार सुनिश्चित किया जा सके।
सहारनपुर अंतर्गत ग्राम सलारपुर में टायर फैक्ट्री से फैलते प्रदूषण को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश प्रशासन को दिया अल्टीमैटम
गंगोह (जिला सहारनपुर) — ग्राम सालारपुरा में अवैध रूप से संचालित एक टायर फैक्ट्री को लेकर ग्रामीणों में भारी चिंता फैल गई है। आज यहां भारतीय किसान यूनियन की नई क्रान्ति (स्थानीय) इकाई की आपात बैठक आयोजित की गई। जिसमें सालारपुरा व आसपास के आठ गांवों के प्रतिनिधि, स्थानीय समाज के लोग और प्रभावित परिवारों ने भाग लिया। बैठक में फैक्ट्री से निकलने वाले प्रदूषित पानी और खतरनाक धुएं के कारण महामारी फैलने की आशंका जताई गई।बैठक में उपस्थित लोगों ने बताया कि फैक्ट्री से लगातार निकलने वाला काला और बदबूदार पानी नदी तथा नजदीकी जलस्रोतों में मिल रहा है, जिससे पेयजल व पैदावार दोनों को गंभीर खतरा पैदा हुआ है। जानकारी के अनुसार फैक्ट्री से उठने वाला धुआँ भी आसपास के घरों व खेतों पर छा गया है, जिससे बच्चों व बुजुर्गों में सांस संबंधी परेशानियाँ बढ़ने लगी हैं।भारतीय किसान यूनियन के प्रतिनिधियों ने कहा कि फैक्ट्री के संचालन से स्थानीय पर्यावरण व लोगों की सेहत दोनों प्रभावित हो रहे हैं। यदि शासन-प्रशासन समय रहते कार्रवाई नहीं करते हैं तो शीघ्र ही आंदोलन तेज किया जाएगा। बैठक में यह भी कहा गया कि यदि निष्पक्ष जाँच व त्वरित नियंत्रणात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो गाँववाले सड़क पर उतरकर मजबूर कदम उठाएंगे।
