नर्मदांचल साहित्य एवं कला परिषद द्वारा तुलसी जयंती उत्सव के अवसर पर ‘ज्ञान भवन’, अग्रसेन धाम, फूटी कोठी में साहित्यकारों के सम्मान समारोह का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया
नर्मदांचल साहित्य एवं कला परिषद द्वारा तुलसी जयंती उत्सव के अवसर पर ‘ज्ञान भवन’, अग्रसेन धाम, फूटी कोठी में साहित्यकारों के सम्मान समारोह का भव्य आयोजन हुआ।कार्यक्रम में साहित्य, संगीत एवं कला के क्षेत्र से जुड़े रचनाकारों ने सहभागिता कर आयोजन को यादगार बना दिया।कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती, मां नर्मदा एवं गोस्वामी तुलसीदास जी की पूजा-अर्चना एवं आरती से हुआ। संस्था की संयोजक बहनों द्वारा तुलसीदास जी की दोहों का स्वरबद्ध सामूहिक गायन किया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय एवं साहित्यिक भावनाओं से सराबोर हो उठा।परिषद के मीडिया प्रभारी नरेन्द्र शर्मा ने बताया कि समारोह में आमंत्रित साहित्यकारों का पुष्पहार, दुपट्टा, प्रतीक चिन्ह एवं भेंट प्रदान कर सम्मान किया गया। सम्मानित साहित्यकारों में गिरिराज बाजपेयी, सदाशिव कौदिक, प्रभु त्रिवेदी, सोमील महान्ती, डॉ. गोविन्द शुक्ल, गिरिराज उपाध्याय, प्रदीप नर्वी, मुकेश इंदौरी, अनिल पार एवं चंद्रेश्वर साकले सहित अनेक रचनाकार शामिल रहे। समारोह में संस्था के संरक्षक काशीनाथ, संस्थापक डॉ. बालकृष्ण भट्ट तथा विशेष आमंत्रित अतिथि मदन सराफ एवं अशोक टेमले की गरिमामयी उपस्थिति रही। बड़ी संख्या में नर्मदिया ब्राह्मण समाज के महिला-पुरुष भी कार्यक्रम में शामिल हुए।परिषद से जुड़े पदाधिकारियों एवं सदस्यों में श्रीधर बर्दे, नन्दकिशोर बर्दे, डॉ. कृष्णकांत शर्मा, प्रो. (डॉ.) विजय घोरे, शिवकुमार चौरटान, उमेश महालकरी, नरेन्द्र शर्मा, योगेश उपाध्याय, रविंद्र महोदय, शरद शर्मा, दिनेश दूबे, सत्येन्द्र दूबे, महेश काशीर, विवेकानंद खिल्लारे, सुरेश अत्रे, विनोद टेमने, कमलेश गिरोटे, स्वयं प्रकाश बर्दे, प्रो. (डॉ.) गोपाल शर्मा, योगेन्द्र चतुर्वेदी, सूरज सोनी, प्रमोद शर्मा, दिनेश भारद्वाज, दिनेश पवार, पूजा सोनी, निमा गोरी, तृष्णा बिल्लारे, अनुपमा जोशी, सोनाली मारकंडे, सरिता साकले, एल्लवी भारद्वाज, ममता शर्मा, विनिता शर्मा, रमा टेमले, युका बर्दे, वीणा मंडलोई, चन्द्रमणि बघेल, रेखा काशीर, गरिमा अत्रे बर्दे, भावना डोंगरे, शिवा भट्ट एवं मंजुला साकले सहित अनेक साहित्यप्रेमी एवं परिषद सदस्य उपस्थित रहे। मंचासीन साहित्यकारों ने गोस्वामी तुलसीदास के जीवन, व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तुलसीदास जी का साहित्य भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और लोककल्याण की अमूल्य धरोहर है। उनकी रचनाएं आज भी समाज को संस्कार, सद्भाव और मानवीय मूल्यों का संदेश देती हैं।इस अवसर पर राज हेमराज मारीश की कृति ‘नेहा की निधि’ का विमोचन भी किया गया। साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले रचनाकारों के सम्मान से समारोह की गरिमा और बढ़ गई।कार्यक्रम का प्रभावी संचालन डॉ. कृष्णकांत शर्मा ने किया, जबकि कवि-कलाकारों के साथ आकाश प्रदर्शन पुनमजी सोनी द्वारा किया गया। तुलसी जयंती के इस आयोजन ने साहित्य, कला, संगीत और संस्कृति को एक मंच पर लाकर साहित्यप्रेमियों को भावविभोर कर दिया।नर्मदांचल साहित्य एवं कला परिषद का यह आयोजन साहित्यिक प्रतिभाओं को सम्मान देने तथा भारतीय संस्कृति एवं साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने की दिशा में एक सराहनीय पहल के रूप में सामने आया।
